Romantic Ghazal For Lover

romantic ghazal for lover

Romantic Ghazal For Lover In Hindi

 

 

Romantic Ghazal For Lover,  हेलो दोस्तों में इस पोस्ट में आपको ग़ज़ल की कुछ ख़ास पक्तिया लेकर आया हूँ हम आशा करते है आपको पसंद आएगी। हमें लिखिए आपको किस तरह के आलम में सुनना पसंद है। शायरी इश्क़ की। ज़िंदगी के ख़ामोश लबों की या मोहब्बत के लम्हों की। ग़ज़ल की तारीफ़ में बस इतना ही। गुनहगार हो जाता है इश्क़ में कोई मशहूर।

 

उसने होंठों से छू कर
हमें शराबी कर दिया
कोरे कागज के जैसा कोई रंग न था ज़िंदगी में।
उसने छूकर लबों को ग़ुलाबी कर दिया। *

इत्र सी महक है सांसों में उसके
खुशबू है रंगत है फूलों से हटके
हमें उसकी चाहत ने जज़्बाती कर दिया।
उसने होंठों से छू कर हमें शराबी कर दिया। *

न थी कोई कस्मकस उससे मिलने की बेचैनी।
कम्बख्त इस दिल ने जज़्बाती कर दिया।
उसने होंठों से छू कर शराबी कर दिया। *

अचानक से वो चाँद के दीदार को छत पर चले आये
लो मुकम्मल हो गई अब तारीख़ भी ईद की। *

तुम हमें अच्छे लगते हो उसने
बस इतना ही कहा हमसे।
वज़ह पूछा तो कहाँ
उम्र गुजर जाएगी
हर शब्द बयां करने में। *

मैं भी इश्क़ की क़लम से कब तक कागज़ को जख्मी करूँ।
बस यही सोच में हमने खुद को फ़कीर / सन्यासी कर दिया।
उसने ओंठों से छू कर हमें फिर से शराबी कर दिया।
कोरे कागज के जैसा कोई रंग न था ज़िंदगी में।
उसने छूकर लबों को ग़ुलाबी कर दिया। * Prem Thakur…

 

Romantic Ghazal For Lover

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ये मन करता है,
में लिख दूँ कई किताबें
बस तेरी मासूमियत पर
फिर दिल डरता है।
कहीं हर शख्श तेरी चाहत का
तलबग़ार न हो जाये। *

उसकी नाक की नथनी पर में सज़ल लिखूं।
उसके होंठों की नाजुकी पर में ग़ज़ल लिखूं। *

उसके खुले बालों की महक
ने दिल जीत लिया मेरा
बो जब भी लहराती है, जुल्फे
बेवज़ह मौसम का मिज़ाज़ बदल देती है। *

हाँ यक़ीनन में तो फ़ना हो गया
उसकी एक झलक देखकर
हर रोज़ न जाने आईने पर क्या गुजरती होगी।
जब वो बालों को बिखरा कर, साबरती होगी। *

तू इतना कमजोर सा क्यों लगता है।
तुझे क्या हो गया ऐसा दोस्त कहते है।
आज समझ आया मुझे
इश्क़ किसे कहते है। * RMS. Rajput…

 

इल्तज़ा अहसास

 

रातों की नींदों में भी अपना प्यार अपना यार होता है।
यकीनन जिसका दर्द है बस केवल वही रोता है।
ख़ुशहाल ज़िंदगी में सब अपना – अपना कहते है।
तकलीफ़ के आलम में हां कहा गैर के दर्द पर कोई रोता है।

जहा प्यार है सुकून है तकलीफें भी वही मिली।
उठाया प्यार सुकून – परछाई के रूप में मुस्किले वही मिली।
में किसको कहूं की सारे काम – काज के बाद एक रज़ा होता है।
तकलीफ़ के आलम में हां कहा गैर के दर्द पर कोई रोता है।

मुश्किल से काटे वह दिन पतझड़ के
सावन के उपवन के रंगोली पवन के
जिसने हंस कर कहा सब कुछ पा लिया हमने
यकीनन सच है सब कुछउसी ने खोया होता है।
महफ़िल में मित्र है सब है, पर केवल धनी लोगो के
सराफत में अब वो दम कहा, अब कोई एक ही क़ाफ़ले में सरीख़ होता है
तकलीफ़ के आलम में हां कहा गैर के दर्द पर कोई रोता है। Safeeq Ustaaz…

 

 

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